सागर नगर निगम का जल सुरक्षा अभियान , हेल्पलाइन नंबर जारी
सागर: पिछले दिनों इंदौर में दूषित पेयजल (Contaminated Water) से हुई दुखद मौतों के बाद अब सागर में भी प्रशासन चौकन्ना हो गया है। नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने शहर की जलापूर्ति प्रणाली (Water Supply System) को दुरुस्त करने और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
जलापूर्ति निगरानी कंट्रोल रूम (Water Supply Monitoring)
नगर निगम ने पाइपलाइन लीकेज (Pipeline Leakage) की पहचान और पानी की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए एक विशेष कंट्रोल रूम की स्थापना की है। यह कंट्रोल रूम सामान्य प्रशासन शाखा में सुबह 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक सक्रिय रहेगा। नागरिक पेयजल संबंधी किसी भी समस्या या गंदे पानी की शिकायत के लिए नोडल अधिकारी मनोज अग्रवाल (8982592659) और सहायक नोडल अधिकारी राहुल रैकवार (7583894208) से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

हैंडपंप और कुओं के पानी की वैज्ञानिक जांच (Scientific Water Testing)
निगमायुक्त ने टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड, सीवर प्रोजेक्ट और MPUDC के अधिकारियों को संयुक्त रूप से निर्देश दिए हैं कि शहर के सभी सार्वजनिक कुओं और हैंडपंपों की गुणवत्ता (Water Quality) की अनिवार्य रूप से जांच की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक वैज्ञानिक तरीके से पानी की टेस्टिंग रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इन जल स्रोतों को पीने योग्य न माना जाए। नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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भीतर बाजार के कुओं में मिला अम्लीय पानी (Acidic Water Contamination)
जांच अभियान के दौरान निगमायुक्त ने स्वयं जवाहरगंज और भीतर बाजार स्थित शीतला माता मंदिर के पास जल स्रोतों का निरीक्षण किया। प्राथमिक जांच में वहां के कुओं में बड़ी मात्रा में अम्लीय गंदा पानी पाया गया। सुरक्षा के लिहाज से इन स्रोतों पर तत्काल लाल रंग से चेतावनी लिखवाई गई है कि इनका जल पीने योग्य नहीं है। जिन क्षेत्रों में रिपोर्ट निगेटिव आएगी, वहां इसी तरह लाल रंग के निशान लगाए जाएंगे।
राजघाट परियोजना के जल उपयोग की अपील (Pure Drinking Water)
वर्तमान में टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा राजघाट जलप्रदाय योजना (Rajghat Water Project) के माध्यम से घर-घर शुद्ध पेयजल पहुँचाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस जल की नियमित रूप से गुणवत्ता जांच (Quality Audit) की जा रही है। निगमायुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे कुओं या हैंडपंपों के असुरक्षित जल के बजाय राजघाट योजना के तहत मिल रहे शुद्ध पानी का ही उपयोग करें।

